Honouring talent, lauding achievements at the Maharana Mewar Foundation Awards in Udaipur

Carrying forward its glorious tradition of honouring the service of permanent value rendered to society, Maharana of Mewar Charitable Foundation (MMCF) successfully concluded the Maharana Mewar Foundation 37th Annual Awards (MMFAA) at The City Palace, Udaipur. Starting with the presentation of certificates to students, the ceremony was followed by the ritual when the awardees received awards from Dr. K. Kasturirangan, Chief Guest of the Ceremony and Shriji Arvind Singh Mewar of Udaipur, Chairman and Managing Trustee of Maharana of Mewar Charitable Foundation, Udaipur.

Instituted in the year 1980-81 by Maharana Bhagwat Singh Mewar, the Maharana Mewar Foundation Annual Awards are one of the oldest award schemes in the country to be instituted by a non-profit organisation. It was conceptualised to honour college and school students of Udaipur who had excelled in their studies and gradually broadened the spectrum to felicitate international scholars, scientists, academicians, musicians/performers, social activists, environmentalists and people who have broken the mould and provided inspiration to the world around them.

“The Awardees are selected because they are role models in our society, and credible icons for youngsters,” said Shriji Arvind Singh Mewar, Chairman and Managing Trustee of the Maharana of Mewar Charitable Foundation. Recognition from society adds more vigour and direction in the life of an achiever, however modest or celebrated he/she may be. The task of nation-building is incomplete without such achievers being acknowledged for their contribution to society. This contribution, please note, is of permanent nature. It lasts for generations. It provides a distinct identity to the Awardee and gives Foundations like ours a sense of immense accomplishment.”

These awards are annually organised by Maharana of Mewar Charitable Foundation (MMCF) which is committed to nurturing centres of excellence in heritage management, fine arts, the performing arts, education, ecological management, philanthropy, spirituality and sports.Unique in having conceived and actualised the practices of ‘livingheritage’,the MMCF is sharing ancient legacies through broad-based and sustainable platforms of development within Rajasthan, in India and through global outreach programmes.

“Inspiration is the key word,”explained Shriji Arvind Singh Mewar,”when my respected father, His late Highness Maharana Bhagwat Singh Mewar was establishing the Maharana of Mewar Charitable Foundation in 1969, he wanted it to serve as a temple of inspiration for future generations. He firmly believed that a nation could not be built without real-life inspiring role models. Character-building goes hand in hand with nation-building.”

Each of the Awards commemorates an iconic personality or name associated with the rich and glorious history of Mewar stretching back to 1400 years. Some of the notable awardees in the past years included writers-poets, performers and visionaries like Prof. Sir Angus Deaton, Prof. A P J Abdul Kalam, Dr. E. Shreedharan, Mr. Sunil Dutt, Mr. R. K. Laxman, Dr. Rahi Massom Raza Ms. Lata Mangeshkar, Ms. P T Usha and Mr. Harivansh Rai Bachchan, etc.

To name a few among many others, this year, Colonel James Tod Award was presented to Dr. Paul T. Craddock while Ms. Swati Chaturvedi won Haldighati Award. Ms. Geeta Seshamani and Mr. Kartick Satyanarayan were bestowed upon Maharana Udai Singh Awards. Dagar Gharana Award for this year went to Ustad Mohi Bahauddin Dagar and Mr. Suresh Wadekar won Hakim Khan Sur Award.

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सिटी पेलेस के वार्षिक कैलेंडर ‘वैष्णव सम्प्रदाय के धर्मध्वजी : मेवाड़ के 58वें श्रीएकलिंग दीवान महाराणा राजसिंह’ का विमोचन

महाराणा मेवाड़ हिस्टोरिकल पब्लिकेशन्स ट्रस्ट, उदयपुर द्वारा प्रकाशित वार्षिक कैलेंडर ‘वैष्णव सम्प्रदाय के धर्मध्वजी : मेवाड़ के 58वें श्रीएकलिंग दीवान महाराणा राजसिंह (प्र.) का विमोचन महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउण्डेशन उदयपुर के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी श्रीजी अरविन्द सिंह मेवाड़ ने किया।

कैलेंडर विमोचन के अवसर पर पब्लिकेशन्स ट्रस्ट के प्रबंधक गिरिराज सिंह ने बताया कि इस वर्ष 2019 के वार्षिक कैलेंडर में महाराणा राजसिंह (प्र.) के शासनाकाल (ई.स. 1652-1680) में मेवाड़ राज्य में हुए प्रगतिप्रद एवं ऐतिहासिक घटनाओं से सम्बन्धित चित्रों को दर्शाया गया है। कैलेंडर में सर्वप्रथम मेवाड़नाथ परमेश्वरांजी महाराज श्रीएकलिंगनाथजी का चित्र दिया गया है तथा राजसिंहजी के शासनकाल में पधारे श्रीद्वारकाधीशजी, श्रीनाथजी, श्रीनवनीतप्रियाजी तथा श्री विट्ठलनाथजी की छवियों व हवेलियों के चित्रों को दर्शाये गये हैं। उनसे नीचे ही विश्वप्रसिद्ध राजसमंद झील पर महाराणा राजसिंह का चित्र दर्शाया है तथा उनके एक ओर मेवाड़ में श्रीनाथजी की अगुवाई करते हुए का चित्र है तो दूसरी ओर महाराणा का स्वर्ण तुलादान के चित्रादि दर्शाये गये हैं।

श्री सिंह ने बताया कि महाराणा राजसिंह के शासन के समय सम्पूर्ण भारत में सभी ओर कई असहिष्णु गतिविधियां तात्कालीन मुगल शासक द्वारा चलाई गई थी। ऐसे समय में मेवाड़ के महाराणा ही एकमात्र ऐसे शासक थे जिन्होंने सीधे तौर पर मुगल फरमानों का प्रचण्ड विरोध किया। महाराणा राजसिंहजी यहीं नहीं रूके उन्होंने औरंगजेब के फरमानों के विरुद्ध जाकर मेवाड़ में वैष्णव सम्प्रदाय श्री द्वारिकाधीशजी, श्रीनाथजी तथा श्री विट्ठलनाथजी की भव्य हवेलियाँ बनवा ठाकुरजी, गुसांईजी तथा उनके साथ आए वैष्णवियों आदि के लिए भी कई ऐतिहासिक कार्य करवाये। राज्य की समृद्धि के लिए महाराणा राजसिंह ने कई ऐतिहासिक जलाशय, कुण्ड एवं बावड़ियां का भी निर्माण करवाया। यहीं नहीं औरंगजेब की इच्छा के विरुद्ध चारुमती से विवाह कर चारूमती की इच्छाओं का मान रखा। महाराणा ने मुगल इच्छा के ही विरुद्ध शरणागत आये महाराजा अजीतसिंह को बाल्यावस्था में अपने यहां शरण व सुरक्षा दे औरंगजेब की असहिष्णु गतिविधियों का मुँह तोड़ जवाब दिया।

वर्ष 2019 के वार्षिक कैलेंडर में जनवरी से दिसम्बर तक के पृष्ठों के साथ ही पीछे तीन पृष्ठों में वैष्णव सम्प्रदाय के मंदिरों की ऐतिहासिक घटनाओं के वर्णन के साथ गुसांईजी श्री दाऊलालजी के समय नाथद्वारा पधारे पुष्टिमार्ग की प्रमुख पीठों के सात स्वरुपों का मेवाड़ में आगमन जैसे ऐतिहासिक व पावन चित्रों को भी दर्शाये गये है। महाराणा राजसिंह जी के ऐतिहासिक वृत्तांत के साथ उनके समय के निर्माण कार्यों को भी दर्शाया गया है।

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सिटी पेलेस के माणक चौक में होगा कार्तिक पूर्णिमा का ‘ब्रह्मांजलि 2018’

उदयपुर स्थित सिटी पेलेस के ऐतिहासिक माणक चौक में कार्तिक पूर्णिमा की शाम को महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर के तत्वावधान में ‘ब्रह्मांजलि 2018’ कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। जयपुर घराना की सुप्रसिद्ध कलाकार व आज की नृत्य रचनाकार श्रीमती गीतांजलि लाल के सानिध्य में दिल्ली दूरदर्शन एवं आई.सी.सी.आर. दिल्ली के ‘ए’ ग्रेड कलाकारों की सूची में सुमार श्री अभिमन्यु लाल एवं सुश्री विद्या लाल अपने ग्रुप के साथ प्रस्तुतियां प्रदान करेंगे।

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महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउण्डेशन उदयपुर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी भूपेन्द्र सिंह आउवा ने बताया कि ‘ब्रह्मांजलि 2018’ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फाउण्डेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी श्रीजी अरविन्द सिंह मेवाड़ होंगे। आउवा ने बताया कि मेवाड़ के राजघराने में कार्तिक पूर्णिमा का उत्सव मनाने की परम्परा सुदीर्घ काल से चली आ रही है। कार्तिक पूर्णिमा का यह उत्सव जगत पिता ब्रह्मा की आराधना दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज के दिन देश के ख्यातनाम कलाकारों को मेवाड़ में बुलाकर उन्हें अपनी कला प्रस्तुत करने के अवसर प्रदान किये जाते हैं। इस तरह फाउण्डेशन भारतीय कला एवं कलाकारों को बढ़ावा देने के श्रेत्र में कार्यरत है।

इस वर्ष प्रस्तुति प्रदान करने वाले कलाकार देश ही नहीं विदेशों में भी भारतीय नृत्य कला की प्रस्तुतियां प्रदान कर चुके हैं। नई दिल्ली के राष्ट्रीय कथक संस्थान में रही श्रीमती गीतांजलि लाल भारत की ख्यातनाम कथक प्रतिपादक है, वे बताती है कि आज भी कथक की परम्परा को आगे बढ़ाने के लिये मैं प्रतिबद्ध हूँ और नवोदित कलाकारों को प्रशिक्षण दे रही हूँ ताकि हमारी यह विरासत नई पीढ़ी को प्रदान की जा सके।

गीतांजलि लाल के शिष्य अभिमन्यु लाल राष्ट्रीय कथक नृत्य संस्थान (कथक केन्द्र), नई दिल्ली में कथक की बारीकियां बता रहे हैं तो सुश्री विद्यालाल ए.वी डांस कंपनी कथक अनुनाद की संस्थापक निदेशक है और नई दिल्ली के गीतांजलि लाल संस्थान में अध्यापन का कार्य भी करती है।

MMCF commemorates living heritage and history at 4th World Living Heritage Festival

Maharana of Mewar Charitable Foundation (MMCF), an initiative of the Custodian of the House of Mewar-Udaipur, successfully concluded the grand celebration of India’s rich cultural diversity at the “4th World Living Heritage Festival” amidst vibrant dances, mesmerising music and incredible exhibition of arts and crafts. The four day festival was inaugurated by H.E The Ambassador of France to India Mr Alexandre Ziegler on October 18th, 2018 at City Palace, Udaipur.  

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Mr Alexandre Ziegler in his address recalled the association of the French Embassy with the World Living Heritage Festival since 2012 and shared, “The list of UNESCO World Heritage sites in India is growing steadily, noting that heritage preservation and promotion are both assuming greater significance in India. The power of tourism to promote heritage preservation has to be harnessed.”

An Initiative of MMCF, World Living Heritage Festival is a forum for knowledge exchange where all artists, experts, and heritage enthusiasts come together to celebrate rich cultural diversity of India and the world. The festival aims to explore the relationship between tangible and intangible heritage through inquiries into association of oral history, rites and rituals with historic spaces, be it temples, monuments, museums or public squares in the cities. 

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Since its inception in 2012 as a biennial event, organizations such as the United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization (UNESCO), International Council on Monuments and Sites (ICOMOS), Embassy of France, DRONAH Foundation have been associated with the festival. The festival also witnessed the International Conference on Living Heritage which began on October 17th, 2018 with the Ashwa Poojan at Manek Chowk, The City Palace, Udaipur. 

Speaking at the conference held at the Sabhagaar Conference Hall of the Fateh Prakash Palace Convention Centre, UNESCO Director, Dr Eric Falt said, “Our approach to intangible heritage needs to be innovative. Our targets, in line with key UN Sustainable Development Goals, need to safeguard national and cultural heritage; create jobs through promotion of culture,” he said, emphasizing that new livelihood opportunities had to be created through living heritage promotion for the under-privileged specially the women. 

 

The present Chairman and Managing Trustee of MMCF and the 76th Custodian House of Mewar, Shriji Arvind Singh Mewar commented, “I can say it without a doubt that the concept of Living Heritage today has come of age. It is being widely accepted and talked about. I also take this opportunity to acknowledge the continuous support of UNESCO New Delhi Office since 2012. I am a strong believer in the power of continuity to perpetuate relationships and ideas.” 

In his speech, Shriji also referred to the Venice Time Machine project which has been jointly promoted by the Government of France and many other European institutions. It aims at building a multidimensional model of Venice and its evolution covering a period of more than 1000 years. It is being said that the largest-ever database of documents will be created. Shriji said, “With the support of the governments of France and other countries, the city of Udaipur could also offer such a pioneering project. More than 500 years of records are available within our City Palace itself. Once digitized, these records would be invaluable, to say the least, for posterity.” 

Discussions and performances at the festival

Approaches to living heritage: Prof Amareswar Galla, Curator, Amaravathi Heritage Centre, led the audience through several case studies of heritage preservation and community participation in different continents. She highlighted that “safeguarding cultural heritage” has now become a global priority. Dr NK Chapagain, Centre for Heritage Management-Ahmedabad University; Ms Shalini Dasgupta, conservation architect and Mr Benny Kuriakose, architect and consultant contributed to energetic discussions on the role of ‘oral histories’ and the relationship between rituals, festivals and the built heritage of palaces, forts and temples across time. 

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There were plenary sessions and parallel workshops wherein leading academics interacted with students, activists and craftsmen. 

Sounds of music and dance: The legendary Sharma Bandhu (Sharma Brothers) from Ujjain performed under a banyan tree at the early morning concert – Prabhati, The Morning Raga – in the serene and scenic setting of Gulab Bagh, the green heart of Udaipur. Their devotional music recreated the mood of satsangs with the audience swaying and clapping to the homage Sharma Bandhu paid to Goddess Durga, Lord Shiva and Meerabai. Famous Sufi Sensation Nooran Sisters and contemporary India band Swarathma also performed in the festival.

At the Fatehsagar Pal by the Fatehsagar Lake, dance performances by artistes from the Mudra School of Indian Classical Dance in Ahmedabad held the audience spellbound. Their tribute to Goddess Durga and her incarnations was breathtaking.  ‘Jogiyaar Mahabharata / Bairaath Prasang’ was witnessed by hundreds of music-lovers. The folk musicians, with their sarangis, flute, percussionist instruments and vocals made the evening a truly memorable one.